Brief Introduction about Mass Media in India
पत्रकारिता को अगर सूचनाओं का प्रचार-प्रसार माना जाये तो इस सन्दर्भ में देवऋषि नारद पहले पत्रकार हैं। आदिपत्रकार देवऋषि नारद को भारतीय पौराणिक साहित्यों और कथाओं में सूचनाओं को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाने और अपनी चरपट बुद्धि से समस्याओं का समाधान निकालने वाले के तौर पर पेश किया गया है। आज के समय में हमारे पास सूचना प्राप्त करने के जितने साधन मौजूद हैं, पुराने समय में ऐसा नहीं था। सूचना को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचाने के लिए लोगों ने अपने स्तर पर ही पारम्परिक तरीके विकसित कर रखे थे जैसे मियादी करवाना, कबूतर के माध्यम से सन्देश दूसरी जगह भेजना, राजदूत के माध्यम से सन्देश भेजना आदि इसमें शामिल थे। पुरानी फिल्मों का एक डायलॉग हमें अभी भी याद होगा जिसमे एक आदमी गले में ढोल लटकाये जोर-जोर से चिल्लाता हुआ आता है-----सुनो. . . . . . . सुनो. . . . . . .सुनो. . . . . .और फिर वो अपनी बात कहता है। यह भी सूचना देने का एक पारम्परिक तरीका ही था। प्रिंटिंग प्रेस के आगमन से सूचना-संचार के क्षेत्र में और क्रांति आई। जोनिस गुटेनबर्ग ने सन 1440 में पहली गतिशील प्रि...