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Showing posts from May, 2018

TRP in Media...

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अगर आप टीवी देखते हैं या किसी दूसरे मीडिया-माध्यम का उपयोग करते हैं तो आपने टी आर पी शब्द जरूर सुना होगा। परन्तु इसके वास्तविक अर्थ से हम सभी अभी तक अनभिज्ञ हैं। टी आर पी को टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट कहा जाता है। यह एक तरह की प्रक्रिया है जिसमें यह जानने का प्रयास किया जाता है कि कौन सा चैनल या कौन से चैनल का कौन सा शो सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यह एक तरह से व्यूअरशिप जानने की प्रक्रिया होती है। दर्शक किस तरह की विषयवस्तु को पसंद करता है यह जानने के लिए टी आर पी का ही सहारा लिए जाता है। टी आर पी को मापने के लिए भारत में बहुत सारी एजेंसियां कार्यरत हैं जो अपने विभिन्न टूल्स की सहायता से टी आर पी को मापती हैं। उदाहरण के लिए INTAM (इंडियन टेलीविज़न ऑडियंस मेजरमेंट) एक ऐसी ही एजेंसी है, जो दो तरीकों से टी आर पी का आंकलन करती है :- 1 पीपल्स  मीटर द्वारा  2. फ्रीक्वेंसी द्वारा  इसमें किसी शहर या गांव के चुनिंदा घरों के टीवी सेटों के साथ पीपल्स मीटर लगा दिए जाते हैं। ये पीपल्स मीटर इस बात को डिकोड करते हैं कि दर्शक द्वारा क...

Time To Become Media Literate

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सच सिर्फ उतना ही नहीं होता जितना आपको बताया जाये। वो झूठ भी हो सकता है या बताये गए सच से और ज्यादा भी। इसीलिए आज के दौर में सभी का मीडिया साक्षर होना बेहद जरूरी है।   मीडिया साक्षरता से अभिप्राय दर्शकों ,पाठकों और श्रोताओं की उस क्षमता से है जिसमें वो मीडिया द्वारा प्रस्तुत की गई सामग्री को विश्लेषित कर सकें ,मूल्यांकन कर सके तथा एक सही निष्कर्ष तक पहुंच सके।  अक्सर हम मीडिया द्वारा बताई गई बातों को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लेते हैं। मीडिया द्वारा बताई या दर्शाई गई बात के कई उद्देशय होते हैं। उदाहरण के लिए आजकल पेड जर्नलिज्म का दौर है, तो ऐसे कई कार्यक्रम हैं जो पैसे लेकर तैयार किये जाते हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देशय किसी वस्तु ,सेवा या व्यक्ति की सकारात्मक छवि निर्माण कर उसे विज्ञापित करना होता है। ऐसे में दर्शक को अपनी ही सूज बुज से ये समझना होता है कि कौन सी सामग्री पेड है, कौन सी काल्पनिक है तथा कौन सी तथ्यों पर आधारित है। ये सूज बुज ही उसे मीडिया साक्षर बनाती हैं। वर्तमान समय में ऐसी बहोत सारी फेक (झूठी) ...

Mass Communication___As a Career

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जिस संसार में आप जी रहे हो वो अनंत संभावनाओं  से भरा है। करने वाले के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है और ना करने वाले के लिए कुछ भी आसान नहीं है। ऐसी ही संभावनाओं से भरा जनसंचार का क्षेत्र है।  जनसंचार शब्द उन सभी माध्यमों का धोतक है जिनके द्वारा बहुत सारे लोगों से संचार किया जा सकता है।  उदाहरण के लिए टेलीविज़न ,रेडिओ ,समाचार पत्र , पत्रिकाए तथा सोशल मीडिया सभी जनसंचार के माधयम हैं। हर माध्यम की अपनी एक खास बात है। तो जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाना चाहते हैं उन्हें कुछ बातों पर ध्यान रखना आवश्यक है।  छोटी छोटी आँखों में बड़े बड़े सपने रखने वालों को काम भी बड़े करने होते हैं। आमतौर पर बाहरवीं कक्षा के बाद ही स्टूडेंट अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर जनसंचार विषय में स्नातक करता है। उसके मन में होता है कि ये एक ग्लैमर से भरी दुनिया है और वो आसानी से अपनी जगह यहां बना लेगा। परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है।  थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों का ही सामजस्य इस कोर्स में होता है।  जैसे जैसे विधार्थी इस कोर्स को करता जाता है वैसे वैसे वह ज...

Chalte....Chalte....

चलते चलते इतनी दूर आ गए  पता नहीं चप्पल कहाँ उतारी थी , हमको तो बस चलते जाना था जैसा माहौल मिला उसमें ढलते जाना था देखने को दूनिया सारी थी चलते चलते इतनी दूर आ गए कि पता नहीं चप्पल  कहाँ उतारी थी पहले तो...... किताबों से लव था, फैशन से भी दूरी थी बाद में .......ऐसा जकड़ा इसकी-किसकी बेड़ियों ने फैशन करना मज़बूरी थी बस ऐसे ही मुरझा गए वो फूल जिनकी खिलती कभी क्यारी थी चलते चलते इतनी दूर आ गए कि पता नहीं चप्पल कहाँ उतारी थी अलग-अलग नज़रों से देखी गई दुनिया में बात-बात करती, मुलाकात करती दुनिया में स्वार्थी हो जाने की अलग ही खुमारी थी चलते चलते  ..... इतनी दूर...