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Showing posts from October, 2018

आप भी तो हरियाणा से हो...

नमस्कार तुरंत के हरियाणा में आपका स्वागत है। चौंकिये मत तुरंत कहने का मतलब यहां प्रगति या विकास की गतिशीलता से नहीं है, बल्कि हम सबके आस-पास जो तुरंत में घटित हो रहा है उससे है। आप टीवी देखते हो, स्मार्ट फोन जैसे माध्यमों का प्रयोग करते हो उस समय बड़े मजे से चटकारे लेकर इन माध्यमों पर प्यार-महोब्बत जैसी चीज़ों को देखते हो। पर उसको रियलिटी से या वास्तविकता से जोड़ने से डरते हो। ये हरियाणा की सच्चाई है।  हमको बस सिनेमा-परदे पर दिखाया गया प्रेम ही अच्छा लगता है। हमारी आम जीवन शैली में ऐसे प्रेम की दूर-दूर तक कोई मात्रा नहीं है। अगर किसी ने 'ऐसा प्रेम' करने की हिम्मत कर भी ली तो हमारे खाप पंचायतों के तथाकथित उच्च आदर्श रोड़ा बन जाते हैं। यहां ऐसा बिलकुल नहीं है कि पंचायत हमेशा सही ही हो और ऐसा भी नहीं कि ये हमेशा गलत हो। मुख्य समस्या पीढीयों (GENERATIONS) के टकराव की है। एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी के विचारों,धारणाओं को समझने में विफल हो रही है। ये कहना बिलकुल गलत नहीं है कि जो वर्ग पंचायतों में बैठता है वो उन्हीं तथाकथित आदर्शों-रीतियों का पालन क...

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भले ही कुछ राजनीतिक दलों को केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश लाकर उसे दंडनीय अपराध बनाना जल्दबाजी लगा हो। कुछ को यह न्याय और समाज सुधार की बजाय राजनीतिक फैसला ज्यादा लगा होगा। पंरतु हमें सुप्रीम कोर्ट के दिए गए फैसले पर भी गौर करना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने स्वयं तलाक-ए-बिद्दत को अवैद्य घोषित किया था और केंद्र सरकार को इस बारे में कानून बनाने का सुझाव दिया था। केंद्र सरकार कानून बनाकर लोकसभा में इसे पारित करवा चुकी थी परंतु राज्यसभा में ये बिल अटक गया। इसी कारण सरकार ने अध्यादेश को ही अंतिम विकल्प मानकर तीन तलाक को दंडनीय अपराध बना दिया है। अब देखने वाली बात इसमें ये है कि जिस समाज को ध्यान में रखकर यह कानून बना है वह उसे किस तरह से लेता है। स्वच्छ भारत अभियान को चार साल पूरे होने वाले हैं। इन चार सालों में स्वच्छता को लेकर देश में क्या-क्या हुआ ये इन सब बातों पर मंथन का समय है। ये सही बात है कि स्वच्छता सबसे पहले हमारे खुद के व्यवहार से जुड़ी हुई है। अगर हमें हमारा घर साफ-सुथरा रखना अच्छा लगता है तो शहर या देश क्यों नहीं। जितनी आसानी से हम सड़क पर या पार्क में कचरा डाल देते हैं...