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Showing posts from 2019

शोध प्रश्नावली

शोध प्रश्नावली आपके द्वारा दी गई जानकारी को सिर्फ और सिर्फ शोध कार्य हेतु ही प्रयोग किया जाएगा, इसीलिए निश्चिन्त होकर हमारे शोध कार्य का हिस्सा बनें और सभी सवालों के सही-सही जवाब दें। नाम:                                                              कक्षा: पता:                                                               मोबाईल नम्बर : प्रश्न 1. क्या आप समाचार पत्र पढ़ते हैं ? उतर  (a) हां              (b) नहीं प्रश्न 2. आपका पसंदीदा समाचार पत्र कौन-सा है? उतर प्रश्न 3.  आप समाचार पत्र को पढ़ने में प्रतिदिन कितना समय देते हो? उतर  (a) समय_               (b)कभी-कबार  ...

अंतिम दिन भी बरकरार रहा खिलाड़ियों का जोश

अंतिम दिन भी बरकरार रहा खिलाड़ियों का जोश 15 नवंबर 2019 । कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही 57वीं वार्षिक एथलेटिक्स मीट का आज समापन हो गया । यह आयोजन हर वर्ष 'बाल दिवस' के अवसर पर होता है । इस वर्ष प्रतियोगिता में 40 से भी अधिक टीमों ने इसमें हिस्सा लिया । जिसमें अन्य जिलों व राज्यों से आए प्रतिभागी भी शामिल थे । एथलेटिक्स मीट में 100 , 200, 400 व 1600 मीटर की दौड़, 200 मीटर की बाधा दौड़, हैमर थ्रो, जेवेलीन थ्रो, डिस्क थ्रो आदि इवेंट करवाए गए । जिसमें विभिन्न टीमों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । समापन समारोह के अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ केसी शर्मा ने कहा विद्यार्थियों का प्रदर्शन बहुत ही उम्दा रहा और विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए समय समय पर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करवाता रहा है और आगे भी करवाता रहेगा । इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर पवन शर्मा, डीन अकादमिक अफेयर्स डॉ मंजुला चौधरी , विभिन्न विभागों के प्रमुख, प्रतिभागी, विद्यार्थी व उनके अभिभावक मौजूद रहे ।

सत्यम और अजय के बनाए मोजो पैकेज ने मारी बाजी

सत्यम  और अजय के बनाए मोजो पैकेज ने मारी  बाजी  अजय 12 नवम्बर 2019,कुरुक्षेत्र। चंडीगड़ यूनिवर्सिटी और चित्कारा यूनिवर्सिटी के मीडिया फेस्ट में गई आइएमसीएमटी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की टीम ने कई विधाओं में जीत का परचम लहराया। चंडीगड़ यूनिवर्सिटी में आइएमसीएमटी के छात्रों द्वारा पुस्तकालय विषय पर बनी डॉक्यूमेंट्री बहुत पसंद की गई, जिसमें  विपिन एमए मास कॉम अंतिम वर्ष,अमन बीएससी एनीमेशन द्वितीय वर्ष  और  सत्यम बीएससी एनीमेशन द्वितीय वर्ष ने प्रथम स्थान हासिल किया । फोटोग्राफी में बीएससी एनीमेशन द्वितीय वर्ष का छात्र विवेक दूसरे स्थान पर रहा। कैप्शन लेखन में ललिता एमए मास कॉम अंतिम वर्ष की छात्रा तीसरे स्थान पर रही। वहीं चित्कारा यूनिवर्सिटी में मोजो विधा में अजय एमए मास कॉम अंतिम वर्ष और सत्यम बीएससी एनीमेशन द्वितीय वर्ष के छात्रों ने पहले स्थान पर बाजी मारी। नुक्कड़ नाटक में एमए मास कॉम अंतिम वर्ष के छात्र विक्रम और उसकी टीम पहले स्थान पर रही। बीए मास कॉम अंति...

जनसंचार एवं मीडिया प्रौधोगिकी संस्थान में हुआ रोस्ट्रम प्रतियोगिता का आयोजन

21 अक्तूबर 2019। आइएमसीएमटी संस्थान में हर वर्ष होने वाली रोस्ट्रम प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।  कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी द्वारा हर वर्ष रोस्ट्रम प्रतियोगिता दो भागों में करवाई जाती है जिनमें यूजी लेवल और पीजी लेवल सम्मिलित है। आईएमसीएमटी संस्थान में हुई इस प्रतियोगिता में यूजी लेवल पर चौदह और पीजी में पाँच विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में मुख्य विषय एक कानून एक देश, कश्मीर का पुनर्निर्माण, यातायात जुर्माना : सही या नहीं, जल संस्कृति: धन, जल और जीवन, स्मार्ट मोबाइल फोन: शारीरिक और मानसिक प्रभाव, भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव रखे गये। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का सर्वाधिक पसंदीदा विषय यातायात कानून रहा, इस विषय पर चार विद्यार्थियों ने अपनी बात रखी । बीएमसी प्रथम वर्ष की शिवानी, बीएससी ग्राफिक्स एंड एनीमेशन की केशवी ने जल संस्कृति पर अपने विचार रखे । बीएससी प्रिंटिग एंड पैकेजिंग प्रथम वर्ष कमल, बीएमसी प्रथम तृप्तजीतकौर ने मोबाइल का शारीरिक और मानसिक प्रभाव पर अपने विचार रखें । बीएमसी तृतीय वर्ष की रिंकल, मुशायदा ने एक देश ओर एक कानून पर अपने विच...

रत्नावाली मनाने के लिए आयोजन समिति के अलावा बनी 11 और समितियां

2 अक्तूबर 2019 । इस बार की रत्नावली को और भी खास मनाने के लिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आयोजन समिति के अलावा भी 11 और समितियां बनी हैं जोकि रत्नावली से जुड़े अलग अलग काम-काज को देखेंगी । समितियों में हर काम के लिए अलग अलग कार्डिनेटर भी बनाए गए हैं। आयोजन समिति में सबसे पहले यूनिवर्सिटी के कुलपति को रखा गया है, फिर यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार को और साथ ही यूनिवर्सिटी के दूसरे अधिकारियों को भी इसमे जगह दी गई है। आयोजन समिति के अलावा छात्रों के रजिस्ट्रेशन और ट्रांसपोर्टेशन के लिए भी एक समिति बनी है जिसका संचालन डॉ डी एस राणा कर रहे हैं।समिति की ओर से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस काम के लिए 30 छात्रों की एक टीम भी बनाई गई है। स्टेज प्रबंधन समिति के कोनवीनर डॉ विवेक चावला हैं। यह समिति अलग अलग छात्रों को स्टेज की एंकरिंग के लिए तैयार कर रही है। इनके अलावा बोर्डिंग समिति (मेल और फिमेल)   छात्रों और छात्राओं के रहने व खाने पीने संबधी व्यवस्था को देखेगी। अनुशासन को संभालने का काम अनुशासन समिति का होगा। सजावट संबंधी काम का जिम्मा डेकोरेशन समिति को मिला है। मीड...

रत्नावली के सफल आयोजन के लिए छात्र संगठनों ने कसी कमर

रत्नावली 2019 को लेकर विभिन्न छात्र संगठनों में भी उत्साह का माहौल है। रत्नावली के सफल आयोजन के लिए विभिन्न छात्र संगठन भी अपने स्तर पर भरपूर प्रयास कर रहे हैं। इसको लेकर सभी संगठनों के पदाधिकारियों से जानकारी प्राप्त करते हुए सबसे पहले एबीवीपी से हिमाँशु ठाकुर ने बताया कि रत्नावली केवल हरियाणा प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश भर में हरियाणवी संस्कृति, खान-पान, पारम्परिक आभूषण, रीति-रिवाज एवं हरियाणा के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एबीवीपी के कार्यकर्ता स्वयंसेवकों, प्रतिभागियों के रुप में हिस्सा ले रहे हैं और सभी सोशल मीडिया के माध्यम से रत्नावली के बारे में समाज के सभी लोगों को सूचना कर परिचित करवा रहे हैं।  एन एस यू आई के विशाल भारद्वाज ने बताया कि रत्नावली वर्तमान पीढ़ी के अंदर हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत की छाप छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और प्रदेश भर के का उत्साहपूर्वक रत्नावली में हिस्सा लेना उनके अंदर हरियाणा की संस्कृति की जानने की चाह को दर्शाता है। हमारे संगठन के कार्यकर्ता स्वयंसेवक के रुप में रत्नावली ...

म्हारी बोली म्हैं विचार लिखण का न्यारा ऐ सुआद सै

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वि चार अभिव्यक्ति को सशक्त और मजबूत बनाते हैं,  इसीलिए हर साल रत्नावली समारोह में विचार लेखन के लिए एक विशेष पोस्टर लगाया जाता है, जिसमें रत्नावली में आने वाले दर्शक अपने विचार पोस्टर पर लिखकर साझा करते हैं। 34 वें रत्नावली में भी विचार लेखन का पोस्टर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। दूर-दूर से आये लोग पोस्टर पर अपनी बात लिखने के लिए हरियाणवी बोली का ज्यादातर प्रयोग कर रहे हैं। बहुत से विचारों में हरियाणवी डायलोग और हरियाणवी शायरी का प्रयोग किया गया है। लिखने वालों से हिन्दी और अंग्रेजी भाषा से परहेज करने की वजह पुछने पर बताया कि हरियाणवीं बोली से उनका सबसे ज्यादा लगाव है, जिससे ना चाहते हुए भी यह बोली उनकी जुबान पर आ ही जाती है। अपनी बोली में विचारों को साझा करने का एक अलग ही मजा है। सुमित लिखते हैं कि बात्तां मैं तै बात लिकड़े, बात्तां का ए चा हो सै, बात्तां की मरहम पट्टी अर् बात्तां का ए घा हो सै। इसी तरह से अनिल लिखते हैं कि कट्ठे रहणा सहणा, कट्ठे खाणा पिणा म्हारा, ज्यूंदा बसदा रह हरियाणा, बहोत बड़ा सै लाणा म्हारा। लिखने वालों में कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने सामजिक संदेश द...

सैल्फी लेणी सै पर म्हारा स्टाइल मैं

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सा ल दर साल रत्नावली समारोह का हिस्सा रहा सैल्फी कॉर्नर इस बार भी चर्चा का विषय बना हुआ है। 34 वें रत्नावली सामारोह में दूर दूर से आये लोग सैल्फी कॉर्नर पर जाकर अपने-अपने अंदाज में सैल्फियां ले रहे हैं। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक तेजेन्द्र शर्मा बताते हैं कि पिछले तीन-चार सालों से रत्नावली समारोह में अलग अलग मंचों पर यह सैल्फी कॉर्नर बनाए जाते थे मगर इस बार सभी को जोड़कर एक ही जगह बड़ा कॉर्नर बनाया गया है। श्रीमद्भगवदगीता सदन के बाहर एक बड़े से कॉर्नर को सैल्फी कॉर्नर का नाम दिया गया है जिसके दो बड़े पोस्टरों पर हरियाणवी संस्कृति के अलग-अलग रूपों एवं विधाओं की तस्वीर छपी हुई है। सैल्फी कॉर्नर पर तस्वीर लेने आई छात्रा रिम्पी का कहना है कि उसने खंडका पहनकर इस कॉर्नर में कई पोज में तस्वीरें ली हैं। पीछे की आकृतियां सैल्फी को और ज्यादा आकर्षक बनाती हैं। एमबीए के छात्र सुमित अरोड़ा का 34 वें रत्नावली समारोह में आने का यह पहला मौका है। सुमित बताते हैं कि उनके सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र सेल्फी कॉर्नर है। हरियाणवी शैली में सेल्फी लेकर उन्हें बहुत मजा आया। एम०...

बुजुर्गों की विरासत को समेटे शेरसिंह की कहानी

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34वीं रत्नावली में पहली बार आये शिल्पकार प्रजापति शेर सिंह की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। अपनी 7 पीढियों से एक ही पेशे से जुड़े हुए शेरसिंह बताते हैं कि शहर के लोगों की बजाय गाँव के लोग मिट्टी के बर्तनों का ज्यादा प्रयोग करते हैं, जिनमें मटका, कढोंणी, कापण, कुज्जा, लोट आदि बहुत सारे बर्तन मिट्टी से बनाए जाते हैं। इनसे शिल्पकार का रोजमर्रा का खर्चा चलता है। अपनी विशेष क्षमता का जिक्र करते हुए बताया कि वे 2500 चूल्हे एक दिन में तैयार कर लेते हैं। एक दिन में 20 मटके तैयार करने की भी महारत उनको हाशिल है। उन्होंने बताया कि वे पीढ़ी दर पीढ़ी इस कार्य से कई सालों से जुड़े हुए हैं। लेकिन आजकल अपनी आजीविका का संकट उनके सामने खड़ा हो गया है। गांव में बढ़ते शहरीकरण ने उनके बने उत्पादों की बिक्री को काफी हद तक कम कर दिया है। जैसे-तैसे करके गुजारा जाता है।  हालांकि उन्हें पहली बार रत्नावली में आकर बेहद खुशी हो रही है। यहाँ उनकी शिल्पकला के प्रति लोगों के आकर्षण और प्यार को देखकर वह काफी खुश हैं। इसी वजह से शेरसिंह जी का कहना है कि वह आने वाली हर रत्नावली में अपनी शिल्पकला के नमुने पेश कर...

ओमकार चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक 'टेलीविज़न पत्रकारिता' पर एक समीक्षा

ओमकार चौधरी द्वारा लिखित पुस्तक 'टेलीविज़न पत्रकारिता' पड़ने का मौका मिला। ओमकार चौधरी जोकि खुद पेशे से पत्रकार रहे हैं। लेखक द्वारा रचित  उपन्यास 'घेरा' सन 2001 में प्रकाशित हुआ जोकि काफी चर्चित उपन्यास है। श्री चौधरी जी को प्रभात, अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों में काम करने का अनुभव रहा है। हिंदी के मीडिया विद्यार्थिओं की जरुरत को समझते हुए उन्होंने इस पुस्तक का लेखन किया है। वैसे तो लेखक का खुद का अनुभव प्रिंट पत्रकारिता का रहा है परंतु टेलीविजन पत्रकारिता पर लिखने का अनुभव उनको कैसे मिला ये तो लेखक खुद ही बता सकता है। श्री चौधरी जी ने अपनी पुस्तक में भारत में दूरदर्शन की शुरुआत का वर्णन करते हुए उन सभी कड़ियों का जिक्र किया है जिन्होंने भारत में टेलीविजन को लाने में सहयोग किया था। लेखक ने सेटेलाइट चैनलों के आगमन को विस्तार से बताया है। टेलीविजन के प्रभाव का वर्णन करते हुए लेखक कहता है कि जनमानस और राजनीति पर टेलीविजन का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ा है। लेखक का मानना है कि लोगों पर टीवी में दिखाये जाने वाले सीधे प्रसारण ...

रत्नावली के मैं किस तरियाँ चाल्या रागणी कम्पीटीशन

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औढणा अर् पैरणा सिंगार चहिये सै, 16 साल की हौली मैंने भरतार चाहिये सै रागणी का हरियाणवीं संस्कृति तै खासा जुड़ाव रया सै ज्यांतै 34 वीं रत्नावली के पहलडै दिन एअर थियेटर में रागणियाँ सुणाई गई। दूर-दूर तै आई टीम्मा  नै रागणी गाण मैं कति घी सा घाल दिया। सीआईएस कन्या महाविध्यालय कैथल की छोरी ने गैल चाल्लुँगी..जी ना लागदा तेरे बिना  हरियाणवी रागणी गा कै लोगों नै ताड़ि बजाण तैंइ मजबूर कर दिया। फैर दूसरा नम्बर पै आई डीएवी महिला महाविद्यालय यमुनानगर की टीम की छोरी नै  दिन छिप ग्या सै..इब होया सै अँधेरा रागणी गा कै साबित कर दिया कि म्हारी छोरी  गाण बजाण मैं भी किसै तै भी पाच्छै कोन्या। उसकै पाछै आई गांधी आदर्श कॉलेज समालखाँ  की छोरी ने औढणा अर पैरणा सिंगार चहीये सै..16 साल की हौली री मैंने बरतार चहीये सै  रागणी गाकर  सारे सुनण आल्यां का बहोत बढीया मनोरंजन करया । इस तरियाँ हरियाणवी रागणी की इस विधा में कुल 13 टीम्मा ने भाग लिया अर अपनी प्रस्तुति दी। रागणियाँ नै देखण आल्यां का खूब मनोरंजन करया। बड़े-बूढ़े तो रागणियाँ नै सुनण खातर आये अर गैल मैं आजकाल के बाल...

हरियाणवी संस्कृति को सहेजने वाली रत्नावली : एक यात्रा

इब तो या न्यूँए चाल्लैगी...  हरियाणवी संस्कृति की विरासत को संजोकर रखने में रत्नावली महोत्सव का खासा योगदान रहा है। ऐसे में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के युवा और संस्कृतिक विभाग के सभी निदेशकों को याद करना जरूरी हो जाता है जो इस कारवां को यहाँ तक सहेज कर लाये हैं। डॉ हिम्मत सिंह सिन्हा जोकि 1967 से 1974 तक इस विभाग के निदेशक रहे हैं, इनके समय में हर साल रत्नावली महोत्सव मनाया जाता था, मगर उस समय रत्नावली में महज दो या तीन विधाओं का ही मंचन होता था और यह सिर्फ विश्वविद्यालय स्तर पर ही मनाई जाती थी। अनूप लाठर जी 1985 से लेकर 2014 तक युवा और संस्कृतिक विभाग के निदेशक रहे। इनके निर्देशन में ही रत्नावली राज्य स्तरीय महोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। विधाओं की संख्या भी दो या तीन से बढ़ाकर 27 कर दी गई। पहले हरियाणा दिवस के रुप में ही मनाई जाने वाली रत्नावली को आज का 'रत्नवली' नाम लाठर जी द्वारा ही दिया गया है। महासिंह पुनिया को 2014 से 2015 तक इस विभाग में निदेशक के रुप में अपनी सेवा देने का मौका मिला। इन्होंने रत्नावली को मॉडर्न बनाने में अहम योगदान दिया। इन्होंने रत्...

यह भी कोई कहने की बात थी भला

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लि खा तो हर चीज पर जा सकता है, मगर दिक्कत तब होती है जब किसी ऐसे विषय पर लिखा जाए जिस पर आप खुलकर चर्चा भी ना कर सकें। राजस्थान का एक जिला है बाँसवाड़ा, वहाँ की एक घटना ने मुझे आहत कर दिया। घटना में दो महीने की गर्भवती युवती का उसके होने वाले मंगेतर के सामने 12 घंटे में 11 बार रेप हुआ। आरोपियों ने मंगेतर को पहले ही पेड़ के साथ बाँध दिया था इसीलिए वो कुछ ना कर सका। आरोपी युवक और युवती को जंगल की झाड़ियों में फैंककर चले गए। घटना के अगले दिन चूंकि मंगेतर की आँखों के सामने ये घटना हुई थी इसीलिए वो आहत था और उसने आत्महत्या कर ली। ये एक घटना है अब दूसरी घटना सुनिए। एक दम्पति जोड़ा बाइक पर अपनी 2 साल की बच्ची के साथ बरवाला से हिसार जा रहा था तभी उनकी बाइक खराब हो जाती है। पति बच्ची को गोद में ले लेता है और दोनों पति-पत्नी पैदल चलने लगते हैं। पति चलते-चलते आगे निकल जाता है और पत्नी थोड़ा पीछे रह जाती है। इसी दौरान पीछे से सड़क पर एक ट्रंक आता है जिसमें बैठा चालक और उसका सहकर्मी महिला को पकड़ कर जबरदस्ती ट्रंक में बैठा लेते हैं और फिर उसे अपनी हवस की हैवानियत का शिकार बनाते हैं। पति ...

वहाँ उन बच्चों की भीड़ सबसे ज्यादा थी

 'वहाँ उन बच्चों की भीड़ सबसे ज्यादा थी, जो सिर्फ परीक्षा के मौसम में ही मंदिर जाते हैं.... यहां थी वो भीड़👉  अपनी साल भर की पढ़ाई और तैयारी पर भरोसा ना करके किसी भक्ति के चमत्कार पर भरोसा रखना कितना सही है? अपने बच्चों को भक्ति/आस्था/श्रद्धा जरूर सिखाईये मगर खुद की तैयारी पर भी उतना ही विश्वास रखना सिखाईये.... भक्ति सद्विचारों, सकारात्मक ऊर्जा और भावनाओं को शुद्ध करने के लिए की जाती है, असली चमत्कार तो खुद के कर्म और उस पर रख्खे भरोसे से ही होता है... आप कर्म करने में तो आनाकानी कर सकते हैं मगर कर्मफल में नहीं....
पुस्तक समीक्षा हाल ही में एक पुस्तक पढ़ी- भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया , जिसके लेखक हैं डॉ. देवव्रत। डॉ. देवव्रत ने जनसंचार विषय में एम.ए. किया हुआ है और पी एच डी के साथ-साथ रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में भी इन्होंने डिप्लोमा किया हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विषय पर इनके अनेक लेख व शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।   प्रभात प्रकाशन , दिल्ली में छपी इनकी पुस्तक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पहला संस्करण साल 2007 में आया। वैसे तो आधुनिक इतिहास का वर्णन करना सबसे जटिल काम होता है क्योंकि इनकी घटनाओं के तथ्यों में परिवर्तन आता रहता है। किंतु डॉ. देवव्रत ने बहुत ही सरल शब्दों में इस जटिल कार्य को भी पुरा कर दिया है। पुस्तक में भारत के रेडियो , टेलीविजन और वेब मीडिया के विकास को राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक और साँस्कृतिक विकास से जोड़कर बताया गया है , जोकि सत्य प्रतीत होता है। पुस्तक में कई ऐसी ऐसी घटनाओं का जिक्र है जो वाकई में उस जमाने की यादें ताजा कराती हैं। घटनाओं को पढ़कर आँखों के सामने दृश्य खड़ा होता है। पुस्तक कुछ पुराने टीवी धारावाहिकों की याद भी ताजा करती है जैसे रामा...

विपक्ष को चुनाव में ध्रुवीकरण ही बचा सकता है

 हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर इन दिनों जो हवा चल रही है उससे साफ है कि मुकाबला बिलकुल एक तरफा है। मीडिया सर्वे तो इसी बात की ओर इशारा करते हैं। पिछले दस महीनों के घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति के कई मायने बदल दिए हैं। इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी (इनेलो) जोकि हरियाणा में मुख्य विपक्षी पार्टी थी वह टूटने और दल-बदल होने के बाद 19 से 3 विधायकों पर सिमट आई। इनेलो से टूटकर बानी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) भी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। उसको महज इनेलो से विरासत में मिले वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा। ऐसे में इनेलो और जेजेपी ने अपने ही विरासत के वोटबैंक में सेंधमारी की और नुकसान दोनों को ही हुआ। विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के एक साथ आने की सम्भावना बनी थी पर वो भी मुमकिन नहीं हो पाया। चुनाव को जितना समय बाकि है , इतने समय में दोनों दलों के लिए एक नया वोटबैंक तैयार करना दूर की कोड़ी होगी। दूसरी तरफ हरियाणा कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने और अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद से पार्टी की अंधरूनी कलह सड़क पर आ गई है। इससे पार्टी की छवि और वोटबैंक दोन...