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Showing posts from October, 2019

हरियाणवी संस्कृति को सहेजने वाली रत्नावली : एक यात्रा

इब तो या न्यूँए चाल्लैगी...  हरियाणवी संस्कृति की विरासत को संजोकर रखने में रत्नावली महोत्सव का खासा योगदान रहा है। ऐसे में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के युवा और संस्कृतिक विभाग के सभी निदेशकों को याद करना जरूरी हो जाता है जो इस कारवां को यहाँ तक सहेज कर लाये हैं। डॉ हिम्मत सिंह सिन्हा जोकि 1967 से 1974 तक इस विभाग के निदेशक रहे हैं, इनके समय में हर साल रत्नावली महोत्सव मनाया जाता था, मगर उस समय रत्नावली में महज दो या तीन विधाओं का ही मंचन होता था और यह सिर्फ विश्वविद्यालय स्तर पर ही मनाई जाती थी। अनूप लाठर जी 1985 से लेकर 2014 तक युवा और संस्कृतिक विभाग के निदेशक रहे। इनके निर्देशन में ही रत्नावली राज्य स्तरीय महोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा। विधाओं की संख्या भी दो या तीन से बढ़ाकर 27 कर दी गई। पहले हरियाणा दिवस के रुप में ही मनाई जाने वाली रत्नावली को आज का 'रत्नवली' नाम लाठर जी द्वारा ही दिया गया है। महासिंह पुनिया को 2014 से 2015 तक इस विभाग में निदेशक के रुप में अपनी सेवा देने का मौका मिला। इन्होंने रत्नावली को मॉडर्न बनाने में अहम योगदान दिया। इन्होंने रत्...

यह भी कोई कहने की बात थी भला

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लि खा तो हर चीज पर जा सकता है, मगर दिक्कत तब होती है जब किसी ऐसे विषय पर लिखा जाए जिस पर आप खुलकर चर्चा भी ना कर सकें। राजस्थान का एक जिला है बाँसवाड़ा, वहाँ की एक घटना ने मुझे आहत कर दिया। घटना में दो महीने की गर्भवती युवती का उसके होने वाले मंगेतर के सामने 12 घंटे में 11 बार रेप हुआ। आरोपियों ने मंगेतर को पहले ही पेड़ के साथ बाँध दिया था इसीलिए वो कुछ ना कर सका। आरोपी युवक और युवती को जंगल की झाड़ियों में फैंककर चले गए। घटना के अगले दिन चूंकि मंगेतर की आँखों के सामने ये घटना हुई थी इसीलिए वो आहत था और उसने आत्महत्या कर ली। ये एक घटना है अब दूसरी घटना सुनिए। एक दम्पति जोड़ा बाइक पर अपनी 2 साल की बच्ची के साथ बरवाला से हिसार जा रहा था तभी उनकी बाइक खराब हो जाती है। पति बच्ची को गोद में ले लेता है और दोनों पति-पत्नी पैदल चलने लगते हैं। पति चलते-चलते आगे निकल जाता है और पत्नी थोड़ा पीछे रह जाती है। इसी दौरान पीछे से सड़क पर एक ट्रंक आता है जिसमें बैठा चालक और उसका सहकर्मी महिला को पकड़ कर जबरदस्ती ट्रंक में बैठा लेते हैं और फिर उसे अपनी हवस की हैवानियत का शिकार बनाते हैं। पति ...

वहाँ उन बच्चों की भीड़ सबसे ज्यादा थी

 'वहाँ उन बच्चों की भीड़ सबसे ज्यादा थी, जो सिर्फ परीक्षा के मौसम में ही मंदिर जाते हैं.... यहां थी वो भीड़👉  अपनी साल भर की पढ़ाई और तैयारी पर भरोसा ना करके किसी भक्ति के चमत्कार पर भरोसा रखना कितना सही है? अपने बच्चों को भक्ति/आस्था/श्रद्धा जरूर सिखाईये मगर खुद की तैयारी पर भी उतना ही विश्वास रखना सिखाईये.... भक्ति सद्विचारों, सकारात्मक ऊर्जा और भावनाओं को शुद्ध करने के लिए की जाती है, असली चमत्कार तो खुद के कर्म और उस पर रख्खे भरोसे से ही होता है... आप कर्म करने में तो आनाकानी कर सकते हैं मगर कर्मफल में नहीं....
पुस्तक समीक्षा हाल ही में एक पुस्तक पढ़ी- भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया , जिसके लेखक हैं डॉ. देवव्रत। डॉ. देवव्रत ने जनसंचार विषय में एम.ए. किया हुआ है और पी एच डी के साथ-साथ रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में भी इन्होंने डिप्लोमा किया हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विषय पर इनके अनेक लेख व शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।   प्रभात प्रकाशन , दिल्ली में छपी इनकी पुस्तक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का पहला संस्करण साल 2007 में आया। वैसे तो आधुनिक इतिहास का वर्णन करना सबसे जटिल काम होता है क्योंकि इनकी घटनाओं के तथ्यों में परिवर्तन आता रहता है। किंतु डॉ. देवव्रत ने बहुत ही सरल शब्दों में इस जटिल कार्य को भी पुरा कर दिया है। पुस्तक में भारत के रेडियो , टेलीविजन और वेब मीडिया के विकास को राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक और साँस्कृतिक विकास से जोड़कर बताया गया है , जोकि सत्य प्रतीत होता है। पुस्तक में कई ऐसी ऐसी घटनाओं का जिक्र है जो वाकई में उस जमाने की यादें ताजा कराती हैं। घटनाओं को पढ़कर आँखों के सामने दृश्य खड़ा होता है। पुस्तक कुछ पुराने टीवी धारावाहिकों की याद भी ताजा करती है जैसे रामा...

विपक्ष को चुनाव में ध्रुवीकरण ही बचा सकता है

 हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर इन दिनों जो हवा चल रही है उससे साफ है कि मुकाबला बिलकुल एक तरफा है। मीडिया सर्वे तो इसी बात की ओर इशारा करते हैं। पिछले दस महीनों के घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति के कई मायने बदल दिए हैं। इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी (इनेलो) जोकि हरियाणा में मुख्य विपक्षी पार्टी थी वह टूटने और दल-बदल होने के बाद 19 से 3 विधायकों पर सिमट आई। इनेलो से टूटकर बानी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) भी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। उसको महज इनेलो से विरासत में मिले वोटों से ही संतुष्ट होना पड़ा। ऐसे में इनेलो और जेजेपी ने अपने ही विरासत के वोटबैंक में सेंधमारी की और नुकसान दोनों को ही हुआ। विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के एक साथ आने की सम्भावना बनी थी पर वो भी मुमकिन नहीं हो पाया। चुनाव को जितना समय बाकि है , इतने समय में दोनों दलों के लिए एक नया वोटबैंक तैयार करना दूर की कोड़ी होगी। दूसरी तरफ हरियाणा कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने और अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद से पार्टी की अंधरूनी कलह सड़क पर आ गई है। इससे पार्टी की छवि और वोटबैंक दोन...