तुम मुझे अजनबी मानों और मैं तुम्हें

जो कभी पूरी हो नहीं सकती वो ख्वाईस की है मैंने...

कि तुम फिर से मेरी जिंदगी में आओ..

उसी अजनबी की तरह..

कि मैं तुम्हें अजनबी मानुं और तुम मुझे

फिर से वही एक दूसरे से बात करने के बहाने ढूंढे,

तुम मुझसे नोट्स मांगो और मैं तुमसे

तुम मेरे नंबर पूछो और मैं तेरे

तुम मुझसे पहले टीचर का काम करो और मैं तुमसे

तू मुझसे जले और मैं तुझसे

तू मुझे देख के असाइनमेंट बना और मैं तुझे

तू मुझसे अनजान रहे और मैं तुझसे

तू मुझसे अपना प्यार छुपा और मैं तुझसे

तू अपनी आजादी में मगन रहे और मैं अपनी

तू भी अपने सपने देखे और मैं भी

ना मैं किसी से तेरी बात सुनुं और ना तू मेरी

तू मुझे मेरे नाम से बोले और मैं तुझे तेरे से

तू मुझे अपने मन की बात ना बताना और ना मैं तुझे अपने मन की

फिर वो अचानक मेरे अंदर का ज्वाला (तेरे से बात करने का) कभी ना फूटे, तेरे अंदर का भी तेरे अंदर ही रहे

अजनबी थे तो अजनबी ही रहें आगे भी

बस तेरे अन्दर की तेरे में रहे और मेरे अंदर की मेरे में

जो कभी पूरी हो नहीं सकती वो ख्वाइश की है मैंने

कि तुम फिर से मेरी जिंदगी में आओ...

उसी अजनबी की तरह..

कि तुम मुझे अजनबी मानों और मैं तुम्हें

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