म्हारी बोली म्हैं विचार लिखण का न्यारा ऐ सुआद सै
विचार अभिव्यक्ति को सशक्त और मजबूत बनाते हैं, इसीलिए हर साल रत्नावली समारोह में विचार लेखन के लिए एक विशेष पोस्टर लगाया जाता है, जिसमें रत्नावली में आने वाले दर्शक अपने विचार पोस्टर पर लिखकर साझा करते हैं। 34 वें रत्नावली में भी विचार लेखन का पोस्टर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। दूर-दूर से आये लोग पोस्टर पर अपनी बात लिखने के लिए हरियाणवी बोली का ज्यादातर प्रयोग कर रहे हैं। बहुत से विचारों में हरियाणवी डायलोग और हरियाणवी शायरी का प्रयोग किया गया है। लिखने वालों से हिन्दी और अंग्रेजी भाषा से परहेज करने की वजह पुछने पर बताया कि हरियाणवीं बोली से उनका सबसे ज्यादा लगाव है, जिससे ना चाहते हुए भी यह बोली उनकी जुबान पर आ ही जाती है। अपनी बोली में विचारों को साझा करने का एक अलग ही मजा है। सुमित लिखते हैं कि बात्तां मैं तै बात लिकड़े, बात्तां का ए चा हो सै, बात्तां की मरहम पट्टी अर् बात्तां का ए घा हो सै। इसी तरह से अनिल लिखते हैं कि कट्ठे रहणा सहणा, कट्ठे खाणा पिणा म्हारा, ज्यूंदा बसदा रह हरियाणा, बहोत बड़ा सै लाणा म्हारा। लिखने वालों में कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्होंने सामजिक संदेश देने के लिए पोस्टर का उपयोग किया। विचारों की अभिव्यक्ति के लिए पिछले कुछ सालों से रत्नावली समारोह में इस तरह का पोस्टर लगाया जाता है। उम्मीद है कि भविष्य में होने वाले सभी रत्नावली समारोह में यह पोस्टर लोगों की अभिव्यक्ति का माध्यम बनता रहेगा।

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